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"ॐ ह्रीं श्रीं श्री जगदम्बायै नमः – The Divine Mantra for Married Couples to Receive the Blessing of Children"

 "ॐ ह्रीं श्रीं श्री जगदम्बायै नमः – The Divine Mantra for Married Couples to Receive the Blessing of Children"

Read story of  why Mata Parvati  disguised as Sita appeared in front of Sri Ram  read story to know











 

STORY OF JAGDAMBA MATE

## माता जगदम्बा की पौराणिक कथाएँ (Mythological Stories of Jagdamba Devi)

 

"जगदम्बा" (Jagadamba) शब्द का अर्थ है **"ब्रह्मांड की माता"** । यह नाम मुख्य रूप से देवी दुर्गा, आदि शक्ति, पार्वती, लक्ष्मी और सीता के लिए प्रयोग किया जाता है । नीचे दो प्रमुख पौराणिक कथाएँ प्रस्तुत हैं:

 

 

### 📖 कथा 1: माता सीता का जगदम्बा स्वरूप (Ramcharitmanas प्रसंग)

 

**स्रोत:** रामचरितमानस (तुलसीदास कृत)

 

यह कथा तब घटित होती है जब रावण द्वारा सीता का हरण कर लिया जाता है। लंका में अंगद रावण से मिलते हैं और उसे चेतावनी देते हुए कहते हैं :

 

> *"नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा॥"*

 

**अर्थ:** "हे लंकेश! या तो तूने अभिमान या मोह के वश में होकर **भगवान राम की पत्नी सीता** का हरण किया है, जो स्वयं **जगदम्बा (ब्रह्मांड की माता)** हैं।"

 

इस प्रसंग में तुलसीदास जी ने स्पष्ट रूप से **सीता जी को जगदम्बा का स्वरूप** बताया है। इसके अनुसार, माता सीता केवल राजा जनक की पुत्री नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की जननी हैं ।

 

 

### 📖 कथा 2: पार्वती जी का जगदम्बा रूप में प्रकट होना (रामायण प्रसंग)

 

**स्रोत:** रामायण की एक लोक कथा

 

एक बार भगवान राम वन में सीता जी की खोज में भटक रहे थे। वे बहुत दुखी थे और फूलों को सूंघकर अपने मन को शांत करने का प्रयास कर रहे थे। यह दृश्य भगवान शिव और माता पार्वती आकाश से देख रहे थे ।

 

शिव जी ने पार्वती जी को समझाया कि **राम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार** हैं, लेकिन पार्वती जी को इस पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने राम की परीक्षा लेने का निर्णय लिया। वे स्वयं को सीता के रूप में प्रकट करके राम के सामने आ गईं ।





 

राम ने तुरंत पहचान लिया कि यह सीता नहीं हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:

 

> **"माता, आप अकेले वन में क्यों भ्रमण कर रही हैं? भगवान शिव कहाँ हैं?"**

 

पार्वती जी अपनी परीक्षा में असफल होकर लज्जित हो गईं और वहाँ से चली गईं। जब वे वापस लौटीं, तो इस बार वे **जगदम्बा माता** के रूप में प्रकट हुईं संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति और ममता के साथ ।

 

 

### 🙏 कथा 3: जगदम्बा का महिषासुर मर्दिनी रूप (मार्कण्डेय पुराण)

 

**स्रोत:** मार्कण्डेय पुराण - दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ)

 

यह **सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा** है जिसमें माता जगदम्बा **महिषासुर का वध** करती हैं ।

 

#### कथा का सार:

 

एक समय था जब महिषासुर नामक राक्षस ने तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि **कोई भी पुरुष या देवता उसे मार नहीं सकता**। इस वरदान के अहंकार में उसने तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। देवता पराजित हो गए और स्वर्ग से निकाल दिए गए ।

 

**जब देवता हार गए**, तो उन्होंने एकत्र होकर अपनी सारी शक्तियों को एक साथ संकेंद्रित किया। इस सम्मिलित शक्ति से **प्रकट हुईं माता जगदम्बा** जिन्हें दुर्गा, चंडी, अंबिका, महामाया और महिषासुर मर्दिनी के नामों से भी जाना जाता है।

 

देवी ने महिषासुर और उसकी पूरी सेना से युद्ध किया। दैत्यों का संहार करने के बाद, जब महिषासुर स्वयं युद्ध में आया, तो देवी ने उसका वध किया। **जैसे ही महिषासुर मारा गया**, संपूर्ण ब्रह्मांड में खुशी छा गई, देवताओं ने पुष्प वर्षा की, और धरती झूम उठी ।

 

> *"काँपी धरती, थर्राईं दिशाएँ, जब महिषासुर मर्दन को चलीं अम्बिका। बरसे फूल, और धरती पड़ी झूम, जब महिषासुर का वध कर चुकीं जगदम्बा।"*

 

 

### 🔱 माता जगदम्बा का स्वरूप (Iconography)

 

एक ध्यान श्लोक के अनुसार, माता जगदम्बा का स्वरूप अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली है :

 

| विशेषता | वर्णन |

|---------|-------|

| **प्रभा** | हजारों उगते सूर्यों के समान तेजस्वी |

| **वस्त्र** | लाल वस्त्र धारण किए |

| **आभूषण** | मुंडों की माला (सिरों की माला) पहने |

| **हाथ** | चार भुजाएँ - एक में जपमाला, दूसरे में पुस्तक (ज्ञान), तीसरा अभय मुद्रा (रक्षा), चौथा वरद मुद्रा (वरदान) |

| **नेत्र** | तीन नेत्र (सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी) |

| **मस्तक** | चंद्रमा और मुकुट से सुशोभित |

| **आसन** | कमल पर विराजमान |

 

वे **वेदों की जननी (वेदजननी)** हैं और विष्णु को भी मोहित करने वाली विष्णुमाया कहलाती हैं ।

 

 

### 🏛️ प्रमुख मंदिर (Major Temples)

 

| मंदिर | स्थान | देवी का स्वरूप |

|--------|--------|----------------|

| देवी जगदंबी मंदिर | खजुराहो, मध्य प्रदेश | पार्वती |

| महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर | कोल्हापुर, महाराष्ट्र | लक्ष्मी |

| श्री जगदम्बा देवी मंदिर | कासरगोड, केरल | जगदम्बा |

| आश्वी गाँव मंदिर | अहमदनगर, महाराष्ट्र | जगदम्बा (चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध) |

 




 

### 💡 निष्कर्ष

 

**जगदम्बा केवल एक देवी नहीं हैं वह संपूर्ण सृष्टि की जननी, शक्ति का मूल स्रोत, और करुणा की प्रतिमूर्ति हैं।** वह दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती और सीता के रूप में विभिन्न लीलाएँ करती हैं, लेकिन उनका सार एक ही है — **सृष्टि की रक्षा, पालन और संहार की अद्वितीय शक्ति।**

 

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क्या आप किसी विशेष कथा पर अधिक विस्तार चाहेंगे? मैं महिषासुर मर्दिनी की पूरी कहानी या माता सीता से जुड़े अन्य प्रसंग भी साझा कर सकता हूँ।

 

 

## माता जगदम्बा की एक कम प्रचलित कथा: आश्वी गाँव का चमत्कार (A Less Known Story of Jagdamba Devi: The Miracle of Ashvi Village)

 

आमतौर पर जगदम्बा माता की कथा दुर्गा, पार्वती या सीता के संदर्भ में सुनने को मिलती है, लेकिन महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के **आश्वी गाँव** में माता से जुड़ी एक अद्भुत और कम चर्चित लोककथा प्रचलित है। यह कहानी विश्वास, भक्ति और माता की कृपा के साथ-साथ मानवीय लालच की कमज़ोरी को भी दर्शाती है।

 

### 1. विवाह के बर्तनों का चमत्कार (The Miracle of the Wedding Vessels)

 

कहानी के अनुसार, आश्वी गाँव में जगदम्बा माता का एक प्राचीन मंदिर है जो चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। ऐसी मान्यता थी कि जब गाँव या आसपास के क्षेत्र में किसी के घर विवाह का आयोजन होता था, तो लोग माता से प्रार्थना करते थे। माता की कृपा से मंदिर के आसपास के जल में से **विवाह के सभी बर्तन थाली, गिलास, कटोरी, कलश अपने आप प्रकट हो जाते थे**।

 

लोग इन बर्तनों का उपयोग विवाह के कामों में करते थे, और एकमात्र शर्त यह थी कि **विवाह समाप्त होने के बाद सभी बर्तन वापस उसी जल में लौटा देने होते थे**। यह चमत्कार सदियों से चलता आ रहा था, जब तक कि कुछ लालची लोगों ने बर्तन वापस नहीं किए। उनके इस कृत्य से माता नाराज हो गईं और यह चमत्कार लगभग 2-3 दशक पहले बंद हो गया।

 

### 2. पालने का चमत्कार: विश्वास की परीक्षा (The Miracle of the Cradle: A Test of Faith)

 

इसी गाँव और मंदिर से जुड़ी एक और अत्यंत मार्मिक कथा है, जो **संतान सुख** के लिए तरसती एक महिला और माता के अटूट विश्वास की कहानी है।

 

**पहला बच्चा और विश्वास की कमी:**

 

गाँव में एक दंपति रहता था जिसे 14 वर्षों तक संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था। हताश होकर, महिला ने माता जगदम्बा से हार्दिक प्रार्थना की। माता ने उसकी प्रार्थना सुन ली और उसे संतान का आशीर्वाद दिया। महिला ने एक पुत्र को जन्म दिया।

 

माता ने उस महिला को निर्देश दिया था कि वह बच्चे को एक **लकड़ी के पालने** में लिटाकर मंदिर के चारों ओर के जल में छोड़ दे। ऐसी मान्यता थी कि पालना पानी में अपने आप चक्कर लगाएगा और पूरी तरह सुरक्षित बच्चे को वापस लेकर आएगा।

 

महिला ने ऐसा ही किया। उसने बच्चे को पालने में लिटाकर पानी में छोड़ दिया। पालना चलने लगा, लेकिन कुछ ही दूर जाने के बाद महिला का मातृ हृदय विचलित हो गया। **उसने माता के वचन पर पूरा भरोसा नहीं किया** और बच्चे के पीछे दौड़ने लगी। दुर्भाग्यवश, जैसे ही उसने विश्वास खोया, पालना पानी में समा गया और बच्चा वापस नहीं लौटा। महिला अपने अविश्वास का परिणाम भोगते हुए पुत्र के वियोग में रोने लगी।

 

**दूसरा बच्चा और माता की अपार कृपा:**

 

कुछ समय बाद, माता ने महिला को फिर से गर्भधारण का अवसर दिया। इस बार महिला ने अपनी पिछली गलती को नहीं दोहराने का दृढ़ निश्चय किया। जब दूसरा पुत्र हुआ, तो वह पुनः मंदिर के जल में आई और पूर्ण विश्वास के साथ बच्चे को पालने में लिटाकर पानी में छोड़ दिया। उसने माता का नाम लिया और बिना हिले-डुले खड़ी रह गई।

 

तब एक अद्भुत चमत्कार हुआ। जब पालना वापस लौटा, तो उसमें **एक नहीं, बल्कि दो बच्चे थे**! माता ने न केवल उसका नया पुत्र लौटाया, बल्कि पहले वाला बच्चा भी उसे वापस दे दिया। महिला के विश्वास ने उसे उसकी खोई हुई संतान भी लौटा दी।

 







### कथा का सार (Summary of the Story)

 

यह कथा सिखाती है कि माता जगदम्बा की कृपा असीमित है, लेकिन उसके लिए **शर्त है पूर्ण विश्वास और श्रद्धा**। जहाँ अविश्वास के कारण भक्त को अपनी संतान गँवानी पड़ी, वहीं विश्वास ने उसे दोगुना आशीर्वाद दिलाया।

 

> **नोट:** कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह चमत्कार तब बंद हो गया जब एक महिला ने मासिक धर्म के दौरान मंदिर में प्रवेश कर लिया, जिससे माता नाराज हो गईं।

## 1. आपका मूल मंत्र (Your Original Mantra – Corrected)

 

**ॐ ह्रीं श्रीं श्री जगदम्बायै नमः**

 

### उच्चारण (Pronunciation):

Om Hreem Shreem Shree Jagadambāyai Namah

 

### अर्थ (Meaning):

- **ॐ** ब्रह्मांड की प्राणवाणी, परमात्मा का नाद रूप 

- **ह्रीं** दुर्गा / काली / महामाया का बीज मंत्र, हृदय चक्र को जाग्रत करने वाला 

- **श्रीं** महालक्ष्मी का बीज मंत्र, धन, ऐश्वर्य और सौंदर्य का दाता 

- **श्री** समृद्धि और कांति का वाचक 

- **जगदम्बायै** जगत की माता (जगदम्बा) को 

- **नमः** प्रणाम, समर्पण 

 

👉 **कुल अर्थ:** 

हे जगत की माता जगदम्बा, आपको मेरा प्रणाम। आप ह्रीं, श्रीं और श्री के रूप में सृष्टि की संचालिका हैं।

 

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## 2. अतिरिक्त मंत्र (Additional Mantras in Hindi)

 

### (क) जगदम्बा / दुर्गा का सरल मंत्र

**ॐ दुं दुर्गायै नमः**

 

### (ख) महालक्ष्मी मंत्र (धन और ऐश्वर्य के लिए)

**ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः**

 

### (ग) सरस्वती मंत्र (बुद्धि और विद्या के लिए)

**ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः**

 

### (घ) त्रिदेवी संयुक्त मंत्र (दुर्गा + लक्ष्मी + सरस्वती)

**ॐ ह्रीं श्रीं ऐं जगदम्बायै नमः**

 

### (ङ) नवदुर्गा मूल मंत्र

**ॐ ह्रीं ह्रीं दुर्गायै नमः**

 

### (च) महामृत्युंजय मंत्र (सुरक्षा और दीर्घायु के लिए)

**ॐ ह्रौं जूं सः**

 

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## 3. इन मंत्रों का उपयोग कैसे करें? (How to Use These Mantras)

 

| मंत्र | उद्देश्य | जप की न्यूनतम संख्या |

|------|----------|----------------------|

| ॐ ह्रीं श्रीं श्री जगदम्बायै नमः | माता रानी की कृपा, सभी मनोकामनाएँ | 108 (एक माला) |

| ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः | धन, व्यापार, सुख-समृद्धि | 108 |

| ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः | पढ़ाई, बुद्धि, कला | 108 |

| ॐ ह्रीं ह्रीं दुर्गायै नमः | रोग, शत्रु, भय से मुक्ति | 108 |

 

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## 4. जप का सरल विधान (Simple Method to Chant)

 

1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

2. पूर्व या उत्तर दिशा में बैठें।

3. लाल, गुलाबी या पीले रंग के आसन का उपयोग करें।

4. स्फटिक या कमलगट्टा माला लें।

5. मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।

6. अंत में माता जगदम्बा का ध्यान करें।

 

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## 5. ध्यान मंत्र (Dhyana Mantra for Jagadamba)

 

**ॐ सिंहस्थां सुरवन्दितां सुरनतां शुम्भासुरप्राणहाम् । 

त्रैलोक्यैक्यकुटुम्बिनीं जयकरीं श्रीजगदम्बां भजे ॥**

 

(जो सिंह पर विराजमान हैं, देवताओं द्वारा वंदित हैं, शुम्भ-निशुम्भ का वध करने वाली हैं, तीनों लोकों की माता हैं उस श्री जगदम्बा को मैं भजता हूँ।)

 

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